Summons And Warrants me antar in Hindi
समन और वारंट: कोर्ट के दो अलग-अलग हथियार जो न्याय प्रक्रिया को चलाते हैं
समन और वारंट न्यायालय द्वारा जारी किए गए वे कानूनी नोटिस हैं जो आरोपी, गवाह या पक्षकार को न्यायालय में पेश होने का आदेश देते हैं, लेकिन इन दोनों की प्रकृति, सख्ती और परिणामों में बहुत अधिक अंतर है। समन एक सौम्य निमंत्रण की तरह है, जबकि वारंट गिरफ्तारी का सख्त आदेश। यदि आप कानून के बारे में जानने के इच्छुक हैं, तो इस ब्लॉग के माध्यम से हम इन दोनों के बीच पूरे अंतर को समझने का प्रयास करेंगे।
समन क्या है?
समन (Summons) कोर्ट का प्रथम कदम होता है, जो BNSS की धारा 61 से 69 के तहत जारी किया जाता है। यह एक प्रकार का लिखित नोटिस है जिसके तहत आरोपी या गवाह को एक निर्देषित तारीख, समय और स्थान पर उपस्थित होने और दस्तावेज पेश करने या गवाही देने का अनुरोध किया जाता है। समन की दो प्रतियां बनाई जाती हैं जिसमें से एक आरोपी/गवाह को दी जाती है और दूसरी रिकॉर्ड के लिए रखी जाती है। समन को जज, मजिस्ट्रेट या कोर्ट क्लर्क हस्ताक्षर करके पुलिस, डाक या प्रक्रिया सर्वर के जरिए तामील किया जाता है।
समन मुख्यतः गवाह समन, आरोपी समन, उत्पाद समन प्रकार के होते हैं। समन छोटे अपराधों, सिविल विवादों (जैसे किराया रिकवरी, चेक बाउंस) या जांच के शुरुआती चरणों में जारी किया जाता है। समन मिलने पर घबराएं नहीं, यह कोई सजा नहीं है बल्कि प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे प्रक्रिया थोड़ी तेज हो जाती है। समन का अनुपालन न करने पर न्यायालय एकतरफा फैसला (ex-parte decision), जुर्माना या गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकता है। और गवाह द्वारा समन का अनुपालन न करने पर BNSS की धारा 208 के तहत 6 महीने कैद या 1000 रुपये जुर्माना हो सकता है। BNSS की धारा 61-69 के तहत समन कोर्ट का कानूनी आदेश है, और इसे अनदेखा करना न्याय प्रक्रिया में बाधा माना जा सकता है।
समन मिलने पर क्या करें?
1. पोस्टमेन से समन को स्वीकार करें और फोटोकॉपी रखें।
2. तुरंत वकील से संपर्क करें और केस डिटेल्स (वादी/प्रतिवादी नाम, धाराएं, तारीख) दिखाएं और सलाह लें।
3. आवश्यक दस्तावेज इकट्ठा करें जैसे:- कॉन्ट्रैक्ट, रसीदें, ईमेल आदि।
4. निर्दिष्ट समय पर अपने वकील के साथ संबंधित न्यायालय में हाजिर हो जाएं। आरोप सुनें, और अपना जवाब दाखिल करें।
वारंट क्या है?
वारंट (Warrant) BNSS धारा 70 से 90 के तहत अदालत का बाध्यकारी गिरफ्तारी आदेश है, जो आरोपी को निर्दिष्ट स्थान पर मजबूरन पेश करने के लिए पुलिस को गिरफ्तारी का अधिकार देता है। इसमें आरोपी का नाम, अपराध विवरण, गिरफ्तारी निर्देश और वैलिडिटी पीरियड स्पष्ट होता है। वारंट की केवल एक प्रति ही बनाई जाती है जो केवल पीठासीन अधिकारी (जज/मजिस्ट्रेट) ही हस्ताक्षर करते हैं। इसे मुख्यतः पुलिस तामील (execute) करती है।
मुख्य रूप से वारंट तीन प्रकार के होते हैं:
सर्च वारंट (SW): जैसे कि नाम से ज्ञात होता है कि यह न्यायालय द्वारा किसी स्थान, व्यक्ति या वस्तु की तलाशी लेने के लिए जारी किया जाता है, जहां अपराध के साक्ष्य या चोरी की संपत्ति होने का संदेह हो। BNSS की धारा 96 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा जारी सर्च वारंट, पुलिस को तलाशी की अनुमति देता है। जो ज्यादातर जांच या सबूत संग्रह के लिए उपयोगी होता है।
- बेलेबल वारंट (BW): बेलेबल वारंट नाम से ही पता चलता है इसमें गिरफ्तारी के बाद पुलिस जमानत दे सकती है। ज्यादातर ट्रेडमार्क विवादों में BW जारी किया जाता है। BW जारी होने पर वकील द्वारा anticipatory bail के लिए आवेदन करें।
- नॉन बेलेबल वारंट (NBW): नाॅन बेलेबल वारंट में पुलिस जमानत नहीं दे सकती है। इसमें जमानत केवल कोर्ट विवेक पर निर्भर करती है। हत्या जैसे गंभीर अपराधों में न्यायालय द्वारा NBW जारी किया जाता है। NBW जारी होने पर खुद को सरेंडर करें।
समन और वारंट न्याय प्रक्रिया के दो पहिए हैं – एक नरम, एक सख्त। इन्हें गंभीरता से लें, वकील से संपर्क करें। यह ज्ञान आपके व्यवसाय या परिवार को बचा सकता है। Lawhelp4you द्वारा समन और वारंट के बारे में केवल आधारभूत जानकारी देने की कोशिश की गई है। अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों से शेयर करें।